और उस देश में कितने गडरिये थे जो रात को मैदान में रहकर अपने झुन्ड का पहरा देते थे. और भगवान का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और भगवान का तेज उन के चारों ऒर चमका, और वे बहुत डर गए.@लूका २:८-९
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जोसेफ मोहर (1792–1848)

जोसेफ मोहर, 1816–1818 (Stille Nacht); अनुवादक अघ्यात.

फ्रैन्ज़ ग्रुबर, 1820 (🔊 pdf nwc).

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फ्रैन्ज़ ग्रुबर(1787–1863)

खामोश है रात, बखत है रात,
हर चीज़ है चुप हर चीज़ है शान्त
मां और बेटे के तौर पर
धन्य शिशु को प्रनाम कर
येसु तेरे जनम पर
येसु तेरे जनम पर.

खामोश है रात, बखत है रात,
भेदवान देखें वोह पहला निशान
परियां गांएं गीत आलैलुया
बुलाएं किनारे और दूर से
देखो, देखो येह शिशु को.